फिर तुम्हारे गीत गूंजेंगे, खुले आकाश में ! फिर तुम्हारे गीत गूंजेंगे, खुले आकाश में !
अब कर संकल्प, हर पल जब संकल्प, तभी है संकल्प, सार्थक होगा सार्थक होगा...! अब कर संकल्प, हर पल जब संकल्प, तभी है संकल्प, सार्थक होगा सार्थक होगा...!
खुशियाँ बिखेरूँगा जब तक है जान, मुझको पहचान लो, माए नेम इज़ खान...! खुशियाँ बिखेरूँगा जब तक है जान, मुझको पहचान लो, माए नेम इज़ खान...!
कहता है कौन, कि बदकिस्मत हो तुम, अपने हाथों पे लकीरें, बना कर तो देखो...! कहता है कौन, कि बदकिस्मत हो तुम, अपने हाथों पे लकीरें, बना कर तो देखो...!
हार जाए सब कुछ अपना फिर भी जीत की उम्मीद रखिए। हार जाए सब कुछ अपना फिर भी जीत की उम्मीद रखिए।
फिर क्यों उदास बैठा है, चल इक नई दिशा की ओर।। फिर क्यों उदास बैठा है, चल इक नई दिशा की ओर।।